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ज़मीन के कागज़

धारा 80: कृषि भूमि की अकृषक घोषणा, कब ज़रूरी, कैसे और कितना ख़र्च

UP राजस्व संहिता 2006 की धारा 80 की प्रक्रिया, फ़ीस और समय-सीमा, और 2026 का वह बदलाव जिसमें प्राधिकरण क्षेत्र में स्वीकृत नक्शा ही घोषणा मान लिया जाता है।

SCR Housing डेस्क · अपडेट: 4 नवंबर 2026

खेती की दर्ज ज़मीन पर घर, दुकान या उद्योग का इस्तेमाल करना हो तो उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 80 सामने आती है। 2026 में इसमें बड़ा बदलाव हुआ: प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में भवन या लेआउट की अनुमति मिलने पर उसे ही घोषणा माना जाएगा। इसलिए पहला सवाल यह है कि आपकी ज़मीन किस क्षेत्र में है।

धारा 80 क्या करती है

धारा 80 के तहत उपजिलाधिकारी (SDM) यह घोषणा करते हैं कि ज़मीन का उपयोग खेती से जुड़ा नहीं है। अर्ज़ी संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर देता है। इसमें दो स्थितियाँ हैं:

उप-धारा स्थिति नतीजा
80(1) ज़मीन अभी से उद्योग, व्यापार या आवास में इस्तेमाल हो रही है गैर-कृषि घोषणा
80(2) ऐसा इस्तेमाल आगे करना प्रस्तावित है घोषणा, पर ज़मीन तब तक कृषि ही मानी जाएगी; लोन और ज़रूरी अनुमतियाँ ली जा सकती हैं

80(2) की घोषणा के बाद पाँच साल के भीतर काम शुरू न हो तो वह समाप्त हो जाती है। निर्माण पूरा होने या काम शुरू होने पर 80(3) में उसे 80(1) में बदलने की अर्ज़ी दी जाती है, जिस पर SDM को 15 दिन में फ़ैसला करना है। तब मौजूदा सर्किल रेट से गणना कर बाकी फ़ीस ही देनी होती है।

2026 का बदलाव: नक्शा पास तो घोषणा भी

मार्च 2026 में मंत्रिमंडल की मंज़ूरी के बाद यह बदलाव दो अध्यादेशों के रास्ते से आया (संख्या 6, 8 अप्रैल 2026; और संख्या 14, 23 मई 2026)। फिर इसके लिए विधेयक लाया गया। TeamLease RegTech के सार के अनुसार संशोधन अधिनियम 13 अगस्त 2026 को अधिसूचित हुआ और इसे 8 अप्रैल 2026 से लागू माना गया है। मुख्य बातें:

  • ज़मीन विकास प्राधिकरण, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, विनियमित क्षेत्र, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण या आवास एवं विकास परिषद के अधिसूचित क्षेत्र में हो।
  • वहाँ संबंधित कानून के तहत भवन अनुमति, विकास अनुमति या लेआउट की मंज़ूरी मिल जाए।
  • तब उसे 80(2) की घोषणा माना जाएगा, और निर्धारित जाँच के बाद राजस्व अभिलेख में 15 दिन के भीतर प्रविष्टि करनी होगी।
  • घोषणा के समय कोई फ़ीस नहीं लगेगी। 80(3) में इसे 80(1) में बदलते समय फ़ीस का क्या होगा, यह तहसील से पूछ लें।

यानी LDA क्षेत्र में नक्शा पास कराने वाले को अलग से धारा 80 की दौड़ की ज़रूरत आम तौर पर नहीं रहनी चाहिए। नक्शे का रास्ता हमारी LDA नक्शा गाइड में है। आपकी ज़मीन किस संस्था के क्षेत्र में है, यह प्राधिकरण खोजक से देखें।

अधिसूचना का मूल पाठ हम नहीं देख पाए, इसलिए अधिनियम की तारीख़ और संख्या राजस्व विभाग या गज़ट से मिला लें। लंबित पुरानी अर्ज़ियों पर क्या होगा, यह जिन कागज़ों को हमने पढ़ा उनमें साफ़ नहीं है।

पुराना रास्ता कब बचता है

जिस ज़मीन पर ऊपर की शर्तें लागू न हों, जैसे अधिसूचित क्षेत्र से बाहर का गाँव या जहाँ ऐसी अनुमति न ली गई हो, वहाँ SDM वाला रास्ता ही है। अगर ज़मीन विकास प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में है तो संहिता की 80(8) प्राधिकरण की पूर्व अनुमति भी माँगती है।

आवेदन कैसे करें

UP सरकार के पोर्टल vaad.up.nic.in पर दी प्रक्रिया का क्रम यह है:

  1. एकल खिड़की पोर्टल (निवेश मित्र) पर पंजीकरण और लॉगिन करें, फिर सामान्य आवेदन पत्र भरकर यूनिट बनाएँ।
  2. विभाग “राजस्व परिषद” और सेवा “भूमि उपयोग परिवर्तन” चुनें।
  3. कागज़ लगाकर जमा करें।
  4. SDM कार्यालय अर्ज़ी देखता है और तहसीलदार को निरीक्षण के लिए भेजता है।
  5. तहसीलदार की रिपोर्ट पर कोई आपत्ति हो तो SDM 7 दिन में पूछते हैं; आवेदक उसे ठीक करता है।
  6. वाद संख्या दर्ज होती है, फ़ीस ऑनलाइन जमा होती है और सुनवाई होती है।
  7. प्रमाणपत्र ऑनलाइन डाउनलोड होता है।

कानूनी ढाँचा: नियम 85 के अनुसार 80(1) की अर्ज़ी R.C. प्रपत्र-25 में दी जाती है। SDM कम से कम राजस्व निरीक्षक स्तर के अधिकारी से मौके की जाँच करा सकते हैं।

कौन-से कागज़ लगेंगे

उसी पोर्टल पेज पर यह सूची है:

  • सभी भूमिधरों का स्व-घोषणा पत्र
  • ज़मीन का नक्शा, जिस पर सभी भूमिधरों के हस्ताक्षर हों
  • कलेक्टर की तय की हुई ताज़ा सर्किल रेट का कागज़
  • ताज़ा खतौनी की प्रमाणित प्रति
  • ताज़ा खसरे की प्रमाणित प्रति

ज़मीन के कागज़ों की बाकी जाँच के लिए प्लॉट की 12 जाँचें देखें।

ख़र्च: स्रोतों में अंतर है

स्रोत क्या कहता है
राजस्व विभाग का शासनादेश, 17 मई 2024 कृषि सर्किल रेट से निकली रकम का 1% घोषणा शुल्क और ₹50 न्यायालय शुल्क; 1% और 1% मिलाकर कुल 2% लेना नियमों के अनुरूप नहीं
नियम 85(2) (2025 के हाई कोर्ट फ़ैसले में उद्धृत) कृषि सर्किल रेट या राज्य सरकार की तय दर से गणना का 1%
vaad.up.nic.in का पेज (तारीख़ नहीं लिखी) सर्किल रेट का 2%

शासनादेश ताज़ा और साफ़ है, पर 2024 के बाद के बदलाव की पुष्टि तहसील से कर लें। संहिता की एक प्रति में 80(9) के तहत अपने निजी आवास के लिए उपयोग पर फ़ीस न लगने का प्रावधान भी है, इसलिए पात्रता SDM कार्यालय से पूछें।

गणना का उदाहरण: मान लें कृषि सर्किल दर से ज़मीन की रकम ₹20 लाख बनती है। तब शासनादेश के हिसाब से शुल्क ₹20,000 और ₹50 न्यायालय शुल्क होगा। यह सिर्फ़ उदाहरण है। अपने गाँव की दर के लिए सर्किल रेट वाले ज़ोन पेज और ज़िला प्रशासन की सूची देखें।

समय-सीमा

  • अर्ज़ी पर फ़ैसला: धारा 80 की 80(1) और 80(2) में 45 कार्य-दिवस लिखे हैं। 1 सितंबर 2023 के शासनादेश में 45 दिन की बात है। नियम 88(4) में भी 45 दिन का प्रयास लिखा है।
  • मानी हुई घोषणा: 2023 के शासनादेश और हाई कोर्ट के फ़ैसले में उद्धृत पाठ के अनुसार, तय समय में फ़ैसला न होने पर घोषणा मानी जा सकती है, जिस पर तहसीलदार अभिलेख में प्रविष्टि करते हैं। इंडियन कानून की प्रति में यह प्रावधान नहीं दिखता, इसलिए इस पर सीधे भरोसा न करें।
  • बाहरी NOC: 2023 के शासनादेश में संबंधित विभागों की NOC के लिए 30 दिन की सीमा है।
  • नक्शा-आधारित घोषणा: अभिलेख में प्रविष्टि 15 दिन के भीतर।

धारा 80 और भू-उपयोग परिवर्तन एक नहीं हैं

घोषणा का मतलब निर्माण की अनुमति नहीं है। संहिता की 80(7) कहती है कि मास्टर प्लान के प्रस्तावित उपयोग के ख़िलाफ़ इस्तेमाल पर घोषणा नहीं होगी। मास्टर प्लान का भू-उपयोग बदलना अलग प्रक्रिया है। LDA की वेबसाइट पर उसके शुल्क नियमों का तीसरा संशोधन (अधिसूचना 22 सितंबर 2026) रखा है। Indian Masterminds की 1 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 6,000 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर स्थानीय विकास प्राधिकरण फ़ैसला कर सकते हैं, और आवासीय उपयोग के लिए परिवर्तन की दर 50% से घटकर 25% हुई है। रिपोर्ट यह साफ़ नहीं करती कि यह किस मूल उपयोग से परिवर्तन पर लागू है। ये आँकड़े मूल अधिसूचना से मिला लें।

ध्यान रखें

  • साझा ज़मीन: संहिता की 80(4) के अनुसार सभी सह-भूमिधरों की अर्ज़ी चाहिए, या पहले हिस्सों का बँटवारा। हाई कोर्ट के एक आदेश में उद्धृत प्रशासनिक टिप्पणी में कहा गया कि धारा 80 की घोषणा को बँटवारा नहीं माना जा सकता।
  • हिस्से की घोषणा: ज़मीन के सिर्फ़ हिस्से की घोषणा पर उस हिस्से का सीमांकन होता है और उसका ख़र्च भूमिधर देता है।
  • चारदीवारी: संहिता की एक प्रति में 80(2) के लिए चारदीवारी की शर्त है, पर हाई कोर्ट के फ़ैसले में उद्धृत पाठ में नहीं। अर्ज़ी से पहले तहसील से पूछ लें।
  • ख़रीद से पहले: विक्रेता के दावे पर न जाएँ, खतौनी में दर्ज प्रविष्टि और आदेश की प्रति देखें।
  • नक्शे से पहले: घोषणा हो या न हो, नक्शे की शर्तें अलग हैं। बायलॉज 2025 गाइड देखें।

यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। अंतिम स्थिति तहसील, SDM कार्यालय या अपने वकील से पुष्ट करें।

स्रोत

यह गाइड जानकारी के लिए है, क़ानूनी या निवेश सलाह नहीं। नियम और फ़ीस बदलती रहती हैं — कोई भी कदम उठाने से पहले संबंधित विभाग या पोर्टल पर ताज़ा स्थिति जाँच लें। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ।